
एक हस्ता खेलता चेहरा
अपने मक्र में खोने लगा।
धीरे–धीरे वो डूबने लगा
जैसे वो अब खत्म होने लगा।।
दोस्त उसे प्यारे है, न जाने वो
उनसे दूर होने लगा।
वो सबसे जुदा
होने लगा, धीरे– धीरे खत्म होने लगा।।
मानो जैसे लग गई हो कोई बात दिल में
नहीं कह सकता किसी से, अब वो।
खयाल–ऐ–जिल्द में दबने लगा और मर गया!
याराना सबसे रखता है।
सबके दिल को वो सुनता है!
उसके दिल में क्या था जाने
इन बातों से वो बहरा हो गया।
हसता खेलता चेहरा था
न जाने वो खो गया, मर गया..!
यार दोस्त बहुत है, फिर भी अनजाना वो रहता है।
लोगो की कैफ़ी बातो को, दिल से क्यों लगा वो लेता है।।
उसकी बातो में ‘मंतक’ क्या है, जाने वो क्या कह जाता है।
समझ न आता था कुछ भी , सबको हसा कर चला जाता था।
(मंतक= logic)
क्यों है अब वो, की खो गया है अब!
बचा लो उसे डूब जाने से।।
वो फनाः हो रहा है अब।
इससे पहले दुनिया वो छोड़ दे।।
Abhijeet Pandey
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