
बहुत दिनों के बाद तुम्हें ,
बहुत पास से देखा है,
बहुत देर तक देखा है,
बहुत आश से देखा है।
उसी तरह की अब भी काया,
उसी तरह की मधु चितवन है।
उसी तरह का सम्मोहन है,
उसी तरह का आकर्षण है।
आँखें नहीं हटाये हटतीं,
बहुत प्यास से देखा है।
उसी तरह की बातचीत है,
उसी तरह का अपनापन है।
उसी तरह का मुसकाना है,
उसी तरह का भोलापन है।
बौराई मन की अमराई,
मृदु मिठास से देखा है।
उसी तरह की भाव-भंगिमा,
उसी तरह का शरमाना है।
उसी तरह नाखून कुतरना,
बालों पर हाथ फिराना है।
नहीं नमस्ते का ढँग बदला,
बात खास ये देखा है।
Abhijeet Pandey
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