मेरे मित्रों , मेरे भाई बहनो और मेरे करीबी घर वाले जो मुझसे जुड़े है एक रचनात्मक दुनिया में जिससे वास्तविकता का कोई लेना देना नहीं है , अपने मन से पूछे तो क्या रोज़ हम अपनो से इसी तरह मिलते है तारीफ के कसीदे पढ़ते है ( शायद ) लेकिन सबके वास्तविक जीवन में ये मुमकिन नहीं होगा…!

मैने जितना भी समय इसमें व्यतीत किया.. यकीन मानिए सवमुच हम एक झूठे संसार के दावेदार है, यहां इंसान तस्वीरों से बाते करता है, किरदार को देख कर नहीं…

एक उदाहरण देता हूं किसी व्यक्ति ने अपनी तस्वीर पोस्ट कि जिसके किरदार को देखकर अकसर मन खट्टा होता है उसके लिए लोग लिखते है – खुश रहे ऐसे ही हस्ते रहे… सुन्दर छवि , भौकाली तरह तरह की बाते आप अच्छे से जानते है लेकिन उस ही जगह कोई और व्यक्ति जो स्वाभाव से निर्मल , अदब लिहाज वाला , जो अपनी चादर तक अपने पैर को फैलता हो फिर वो बस में सफर करते हुए अपनी तस्वीर लेता है और पोस्ट करता है तो सभी यह लिखते है – तेरी यही औकात है … अरे भाई गाड़ी लेले ऐसे जचता नहीं है , अबे ये क्या पोस्ट कर दिया है तूने … इत्यादि।

तो यह था हमारा फेसबुक का जीवन..
जिसमे रोज़ राम भगवान के नाम के कॉमेंट की भीख मांगी जाती है… की आज 2000 जय श्री राम के नारे लिखेगा वो सच्चा हिन्दू होगा यकीन मनिए इतनी शर्मिंदगी लगती है कि अपने इस आचरण से अपने फायदे के लिए की उनका पेज चले उसके लिए ऊपरवाले को मोहरा बना रहे ( एक सच्चा देश भक्त 1000 बार जय हिन्द लिखेगा) क्या इससे हमे अपनी पहचान और अपने हिन्दू होने का या किसी भी धर्म का होने का सबूत देना पड़ेगा ? अरे तुम्हे जो करना है करो लेकिन ऊपरवाले की छवि को इस्तेमाल करके उनकी छवि ना खराब करो आस्था दिल में और मंदिरों में होती है फेसबुक के कॉमेंट बॉक्स में नहीं , अगर यहां भगवान के नाम का जाप करने से ऊपरवाला खुश हो जाता तो आज सभी मोबाइल चलाने वाले सुखी होते…!

तुषार जी ने बड़ा खूब कहा है… मुझे दो पंक्तियां याद आ गई

तुम्हे खूबसूरत नजर आ रही हैं ,ये राहें तबाही के घर जा रही हैं..!!

मै किसी भी समुदाय या फेसबुक के खिलाफ नहीं हूं मैंने तो बस अपनी बात राक्खी है समझ आए तो समझे वरना जाने दें…🙏🏻

उम्मीद है इसे आप सकारात्मक तौर से समझेंगे।

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Quote of the week

"People ask me what I do in the winter when there's no baseball. I'll tell you what I do. I stare out the window and wait for spring."

~ Rogers Hornsby
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