अकसर हम अपने बचपन में अपने मां पिता से रूठ कर उनसे दूर जाने को सोचते है, मन में उनको कोसते है , उनकी हर बात को कटु वचन कि तरह लेते है। लेकिन आज जब मै बड़ा हुआ हूं दुनिया को देख रहा हूं महसूस कर रहा हूं तो पाता नहीं क्यों ऐसा लगता है उनसे अब बहुत दूर हो चुका हूं शायद ज़िम्मेदारी आने का डर है या उनके साथ वक्त ना बिता पाने का मलाल इस बात को अकसर मेरे आंसू तय नहीं कर पाते लेकिन उस छड़ यह बात समझ आती है जो कि अकसर सभी के मा बाप कहते है की “ जब बड़े होगे तब समझोगे” लेकिन उन्हें क्या कहूं कि अभी भी मै बड़ा हुआ ही नहीं ज़िन्दगी भर उनका साथ चाहिए एक ज़रूरत के तौर पर नहीं बल्कि धूप से जल रहे संसार में उनकी छांव का लालच रखता हूं।

में यह बाते उनसे तो नहीं कह पाता लेकिन बहुत प्रेम करता हूं शायद इतना की मै शब्द भी न ढूंढ पाऊ… अकसर जी चाहता है एक बार पापा के ज़ोर से गले लग जाऊं लेकिन फिर मन शांत हो जाता है कि फिर कभी , बहुत मन करता है कि एक बार फिर मम्मी को गले लगाकर रो सकू… मै ऐसा क्या लिख दू जो मेरे मन को सुकून दे जाए, पिता का त्याग जिसने मुझे झुकना सिखाया नर्म रहना सिखाया की अगर झुक कर चलोगे तो ज़िन्दगी की कसी भी डाली से नहीं टकराओगे , मां का दुलार। अकसर मै अपनी मां से गुस्से में कह देता हूं कि जिस दिन बड़ा हो जाऊंगा उस दिन सारा कर्ज उतार दूंगा जितना मेरे लिए किया है मेरी मां यह सुनकर चुप चाप मुस्कुरा देती है और अकेले में रो लेती है लेकिन सच कहूं तो मै अपना हृदय निकालकर आप दोनों के सामने रख दूं तो तब भी मै आपका किया हुए कर्म और दिया प्यार इसका कर्ज नहीं उतार सकता मेरी श्रुटियो को क्षमा करे और अपना प्यार यू ही बनाए रक्खे….

औरो के लिए संदेश….

दुनिया भी क्या खूब है कि…… जिसके पास माँ-बाप नहीं हैं वो इस रिश्ते के लिये तरसता है और जिसके पास माँ-बाप हैं वो इस रिश्ते की कीमत नहीं समझता।

दुनिया में सबसे अनमोल एक रिश्ता है जिससे कोई भी अछूता नहीं है।एक ऐसा रिशता जो अपना है,जिसमें कोई धोखा नहीं है,जिसमें स्वार्थ के लिये कोई स्थान नहींं है,जिसमें परायेपन की तो परछाई तक नहीं है,और वो रिश्ता है-माता पिता का अपनी संतान से।य़ह एक ऐसा रिश्ता है जो दिल से जुडा होता है।संसार के सभी रिशते नातों में यह रिश्ता अनमोल है।माँ हो या पिता दोनों ही अपनी संतान को प्राणों से भी अधिक चाहते हैं । माँ थोडी नरम होती है जबकि पिता थोडे -से सख्त ।पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि पिता अपने बच्चों से प्यार नहीं करते।पिता अनुशासनात्मक प्रेम करते हैं और माँ निश्छल प्रेम करती है।आज की दुनिया स्वार्थी हो गयी है।माता पिता कभी भी स्वार्थी नहीं होते।वो अगर स्वार्थी होते भी हैं तो अपनी औलाद के प्यार में।

जो माँ जिन्दगी भर अपने बच्चों पर हाथ नहीं उठा पाई बडे होकर वही बच्चे उन माँ-बाप को घर से बेघर कर देते हैं,उन्हे पीटते हैं।आज के बेटे अपने पिता को तो ऐसे पीटते हैं जैसे वे अपने किसी छोटे भाई को पीट रहें हों।इस परिस्थिति को देखकर उन माँ -बाप की आत्मा कितनी दुखी होती होंगी।
उस संतान की आँखो पर पट्टी बँधई हुई है जो माता -पिता जैसे अमूल्य रिश्ते को ठुकराकर बेवफा प्रेम में अपना सिर पचाये,खुद को बर्बाद किये फिरते हैं।धिक्कार है ऐसी संतान पर ।उन्हे यह एहसास नहीं कि जो आनन्द और सुरक्षा माँ की गोद और पिता के अनुशासन में है वह और कहीं नहीं है।

त्याग क्या है…? मेरे नज़रिए से अगर ये कहूं तो गलत नहीं होगा।

एक पिता अपने बच्चों के लिए बहुत सारे त्याग करता है,बस फर्क है तो इतना कि माँ का त्याग तो सबको नज़र आ जाता है पर पिता का त्याग नज़र नही आता है, शायद इसी कारण से लोग माँ को ममता त्याग और स्नेह की मूरत मानकर उसकी पूजा करते हैं, और पिता के अस्तित्व उसके त्याग को अनदेखा कर देते हैं।लेकिन आज का सबसे बड़ा सत्य यही है कि जितना त्याग एक माँ अपने बच्चों के लिए करती है उससे कहीं ज्यादा त्याग एक पिता भी अपने बच्चों के लिए करता है,बस हमे उस त्याग को समझने की जरूरत है, इस दुनियाँ में एक पिता के अस्तित्व को सही पहचान देने की आवश्यकता है।अगर माँ त्याग और ममता की मूरत है तो पिता उस मूरत की नींव है,क्योंकि एक पिता ही माँ के अन्दर ये क्षमता भरता है कि वो ममता और त्याग की मूरत बन सकें, ऐसा किस प्रकार से है ये आप सभी समझ सकते है बोलने की जरूरत नहीं।अंत में बस इतना ही बोलना चाहूंगा कि पिता के अस्तित्व को अनदेखा नहीं करिये, उनका भी पूजा सम्मान करिये,क्योंकि उनका दर्जा माँ से कम नही है।

मै अब अपने लेख को विराम दूंगा एक दोहे के साथ।

पाल पोसा बड़ा किया, कष्ट दिया ना कोय, अपनी तो संतान की चिंता हर मां बाप को होय। यही जीवन का सार है यही है पालनहार, आज्ञा में जो रहे तुम इनकी, सब खुशियां मिलेंगी तोय।।

आपने अपना अनमोल समय लगाकर इसे पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद।

2 responses to “बेटा जब तुम बड़े हो जाओगे..!”

Leave a comment

Quote of the week

"People ask me what I do in the winter when there's no baseball. I'll tell you what I do. I stare out the window and wait for spring."

~ Rogers Hornsby
Design a site like this with WordPress.com
Get started