मजदूर ही देश को चलता था मजदूर ही देश को चलाएगा, क्या पता था सरकार का यह कारोबार मध्यम वर्ग पर भारी पद जाएगा!!

मज़दूर इस वक्त न तो ट्वीटर पर है और न फेसबुक पर। जब कभी वो ऐसी तस्वीर देखेंगे तो फिर से सिहर उठेगे। तब तक मिडिल क्लास कुछ और पत्थर हो चुका होगा। तब तक कोई नेता देवता हो चुका होगा। तब तक यह बच्चा बड़ा होकर किसी और प्लान की तैयारी कर रहा होगा। मजदूर पर सख्ती आदमी बेहाल , परदेश फसे स्वदेशी पर सरकार का जहाज़.. आखिर क्या मोड़ लेगा ये सरकार का कारोबार
मज़दूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. वे पैदल चल रहे हैं. उनके 9पांवों में छाले पड़ गए हैं. बहुत से मजदूर रेल की पटरियों के किनारे किनारे चल रहे हैं ताकि घर तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता मिल जाए. मज़दूर न तो ट्विटर पर है. न फेसबुक पर और न न्यूज़ चैनलों पर है. वरना वो देखता कि उन्हें लेकर समाज कितना असंवेदनशील हो चुका है. सरकार तो खैर संवेदनशीलता की खान है. देश विदेश में फंसे लोगो को सरकार बड़े जहाजों से बुला रही है लेकिन ये मजदूर क्या करे इनकी ज़िमेदारी कौन लेगा। सही मायनों में देखा जाए तो देश को ये मजदूर ये गरीब ही चलाता है इनके साथ ये ज़्याती बहुत गंभीर समस्या में डाल सकती है सरकार को  और रही बात मध्यम वर्ग के आदमी को उसकी रोज़ की आमदनी काट दी गई है नगर निगम में काम करने वाले कर्मचरियों की प्रति माह २ दिन की सैलरी काटने का आदेश जारी किया गया इससे आम आदमी के जीवन में कितना प्रभाव पड़ेगा ये शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। ऐसे गंभीर समय में सरकार से कोई भी उम्मीद रखना हमें कमजोर कर सकता है इसीलिए द्रड़ता के साथ महामारी का सामना करे और परिवार का ख्याल रखें।

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"People ask me what I do in the winter when there's no baseball. I'll tell you what I do. I stare out the window and wait for spring."

~ Rogers Hornsby
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