मजदूर की यह मजबूरी की तस्वीर आपको शायद भावुक कर दे! साइकिल में बोरा , बोरे पर बेटी… इस तरह सिमट के लेती है जैसे कोई मखमल का गद्दा हो शायद यही वजह है जिसे हम देखकर अनजान बन जाते है। यह प्रवासी अपने परिवार के साथ दिल्ली से उत्तरप्रदेश के लिए जा रहा है शायद ये दिल्ली से उत्तरप्रदेश की दूरी हमारे लिए बहुत हो लेकिन सलाम है ऐसे मजदूरों को जो द्रड़ता के साथ बिना किसी शिकायत के अपने घरों के लिए बढ़ते चले जा रहे है। इस प्रवासी के साथ इसका बच्चा भी है जैसा की आप देख सकते है तस्वीर में एक बेटी है जो दिव्यांग है उसे इस मजदूर ने साइकिल पर ऐसे तरीके से लटकाया है सफेद प्लास्टिक के बोरे से झाकती वो मासूम आंखे जोकी महामारी के खौफ से भूख , तपती गर्मी, दर्द और मजबूरियों की गवाह है। ना जाने कितने और मीलो दूर का सफर तय करना बाकी है , ना जाने कितनी और दूर इस बच्ची को ऐसे बोरे में लटके हुए जाना है और दोपहर की गर्मी का सामना किस कदर करेंगे हम महसूस भी नहीं कर सकते आशा है यह परिवार सही सलामत अपने घर को पहुंच जाए और राहत की सांस ले सके….। हमारा निवेदन है आपसे ऐसे दूर दराज से आए मजदूर या रास्ते में जाते हुए दिखे तो पानी पिलाकर खाना देखर उन्हें तसल्ली दें और मदद करे ।

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"People ask me what I do in the winter when there's no baseball. I'll tell you what I do. I stare out the window and wait for spring."

~ Rogers Hornsby
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